आन्तरिक आत्मा की बात

दोस्तों आज में जो कहानी आपके लिये लाई हूँ वो आपको आपकी आन्तरिक आत्मा की बात सुनने के लिए प्रेरित कर सकती हैं दोस्तों यह कहानी बहुत ही रोचक और परेणादायक हैं दोस्तों आत्माए  बोलती हैं अथवा नही यह बात तो बड़े आश्चर्य की है। क्योंकि आज भी जब हम आत्मा की आवाज की बात करते हैं तो हमें विस्वास नही होता की हमारी आत्मा वास्तव मे ही बोल रही हैं। लेकिन जब हम अपने मन के शीशे मे झांक कर देखते हैं तो कुछ कहना चाहती हैं। तो आइए दोस्तों जानते है इस कहानी के बारे मे।

रोहित क्या तुम सचमुच ही मुझसे प्यार करते हो ?

हाँ……

तो फिर आत्मा की आवाज पर विश्वास करो….

रोहित बेचारा क्या बोल  सकता था उसकी गरीबी ने उसे चितिंत कर रखा था। जब से उसने होश सँभाला था, यही गरीबी देख रहा था। उसने गरीबी और परेशानी के सिवा कुछभी नही देखा था। उसकी पत्नी रीता बड़ी ही सुंदर और बुद्विमान थी हर मामले में वह उसकी पूरी- पूरी सहायता करती थी। ईश्वर की कृपा से उसके यहाँ एक बेटे ने भी जन्म लिया।

जब तक वे दोनों पति-पत्नी रहते थे। तब तक उन्हें कभी भी अपनी गरीबी का अहसास नही हुआ था। परंतु जैसे ही रीता एक बच्चे की माँ बनी तो उन्हें दिन प्रतिदिन अपनी गरीबी का अहसास होने लगा था। बच्चे के पालन पोषण के लिये माँ- बाप अपना सब कुछ दाव पर लगा देने को तैयार हो जाते हैं। यही हाल इन माता- पिता का था। जो बच्चो के स्वास्थ्य के लिये अधिक चितिंत रहते थे।करते भी क्या? उनसे बस मे ही क्या था?

बच्चे का स्वस्थ्य बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण था उसकी शारीरिक कमजोरी।

और इस कमजोरी का कारण था। उनकी गरीबी!!

बस यही गरीबी उनके बच्चो के स्वास्थ्य की शत्रु बन गई थी। वह दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी। एक दिन पत्नी ने बच्चे को रोते पड़पते बिखलते देख कर कहा।

रोहित, हम कब तक गरीबी की इस भट्ठी में जलते रहेगें। कब तक हमारा बच्चा भूख के मारे तड़पता रहेगा।

आखिर कब तक…….

रोहित बेचारा अपनी हालत को अच्छी तरह जानता था।उसे पता था इतनी कम आमदनी में उनके घर का गुजाराहोना बड़ा कठिन ही है। ऊपर से बच्चे का बोझ ……….. रीता एक माँ थी,बच्चे की हालत देख उसका दिल भी डूबने लगा था।दुःख के मारे उसकी आँखों से आंसू निकलने लगे। वह बहुत प्रयत्न करता रहा कि किसी तरह से बीबी के सामने उसकी यह कमजोरी न आये। मगर गम जब हद से बढ़ जाता है तो उसे कौन रोक सकता हैं।

रोहित, तुम रो रहे हो ?

हां, रीता……..

लेकिन क्यों ?

अपनी गरीबी के हाथों मै इतना मजबूर हो गया हूँ कि दिमाग भी काम नही कर पा रहा कि अब करू भी तो क्या करूँ कोई भी तो सहायता करने वाला नजर नही आ रहा आखिर इस थोड़े से वेतन मे हम करें भी तो क्या ?

कुछ तो सोचना होगा, अपने लिये न सही तो अपने बच्चो के लिये ही कुछ करना ही होगा……करना ही होगा……

भले ही मुझे नोकरी ढूढ़ने के लिये शहर से बाहर ही क्यों न जाना पड़े।

नही रोहित, तुम बाहर नही जाओगे। मै इस बच्चे के साथ कहाँ भटकती फिरूंगी। देखो न यह हम दोनों के साथ घुला मिला है। कैसे रहेगा यह आपके बिना नही…..नही…..रोहित ऐसा नही होगा।

तो फिर क्या होगा ?

क्या होगा ? यह कहते हुए वह कुछ सोच में पड़ गयी जैसे कुछ याद कर रही हो।

रोहित

हां……

आज मेरा मन कह रहा है की तुम्हे कोई बहुत अच्छी नोकरी मिलने वाली है।

मुझे और अच्छी नोकरी। नही …..नही……यह सभव हो सकता है। अपना भाग्य इतना तेज कहा। छोड़ो इन बातों को यह सब तो लंबे  समय से हो रहा है।हर रोज हम यही आशा लेकर सोते हैं। और यही विचार बना कर मै घर से निकलता हूँ।

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क्या तुम भी आत्मा की आवाज पर विस्वास करती हो ?

करती तो नही मगर आज तुम्हरे आंसू देख कर मेरा मन पिघल गया। मेरी आत्मा तड़प उठी। मैने अभी- अभी हाथ जोड़ कर अपने ईश्वर से पार्थना की…..

हे ईश्वर यदि हमारे मन साफ हैं, हमने आज तक किसी का बुरा नही किया तो फिर हमारे साथ ही क्यों अन्याय कर रहे हो। क्यों हम पर अत्याचार कर रहे हो ?

सारी दुनिया खुशियां मनाती हैं तो हम आँसू बहाते है। ऐसा क्यों हैं ईश्वर यह अन्याय हमारे साथ ही क्यों हो रहा हैं।

हम पर दया करो प्रभु। हम पर यदि दया नही करते तो इस मासूम बच्चे पर तो दया करो जो दूध रोटी के लिए रो रहा है।

पत्थर मत बनो ईश्वर , पत्थर मत बनो।

तो फिर क्या हुआ ? रोहित ने आश्चर्य भरे स्वरों में आपनी पत्नी से पूछा…..

उसी समय मेरी आत्मा से यहआवाज आयी

देवी हमने तुम्हरी फरियाद सुन ली है। अब रोहित को अपने एक निकटतम दोस्त के पास  भेज दो बस तुम्हरी सारी  परेशानियां दूर हो जाएंगी।

रोहित ने अपनी पत्नी के मुख से सब बातें सुनी तो उसे विस्वास तो नही हो रहा था कि ऐसी देवी शक्ति सच हो सकती है। मगर फिर भी दिल को मजबूत करके अपने एक पुराने दोस्त के पास गया जो इसी शहर में कारोबार करता था। वैसे भी उसने अपने बहुत कम दोस्त बना रखे थे। मगर इन सबमें से अच्छा मुकेश को मानता था। क्योंकि वह बहुत अमीर हो गया था, इसलिए वह उससे बहुत कम मिलता था। मगर आज अपनी पत्नी की आत्मा की आवाज वाली की वह परीक्षा करना चाहता था।

जिस समय रोहित मुकेश के दफ्तर में प्रवेश कर रहा था तो मुकेश ने उसे देखते ही चिल्लाना शुरू कर दिया था।

अरे तू कहाँ मर गया था। मैं तो कई दिन से तुम्हे याद कर करके पागल हो रहा हूँ।हमारे घर पर भी चार बार आदमी गया तो अंत मे पता चला की तुम उसे छोड़ कर कहि और चले गए हो

हां, उस मकान का किराया मेरी आमदनी से अधिक था, इसलिए छोड़ना पड़ा।

बस इतनी सी बात ……

मुकेश, तुम्हरे लिये जो बात बहुत छोटी है।वहीमेरे लिये बहुत बड़ी हो सकती है। इसका कारण है मेरी गरीबी और तेरी अमीरी।

बकवास बंद कर साले, इस दोस्ती में अमीरी- गरीबी कहा से आ गई। चल चुपचाप बैठ जा इस दफ्तर में ,आज से तुम इस कम्पनी में बराबर के भागीदार होंगे।

यह तुम…..रोहित की आवाज गले में ही अटक कर रह गई जैसे अपने कानों पर विस्वास न आ रहा हो।

मै जो कुछ कह रहा हूँ, वह सत्य है, मेरे दोस्त न तो यह कोई सपना है न किसी का आदेश, बस कल रात मैने अपनी आत्मा से उठने वाली यह आवाज सुनी थी।

रोहित तुम्हरा सब से प्यारा दोस्त लोगों के पास नोकरी कर रहा है। वह कितना चितिंत है।यह तुम नही जानते मगर यदि तुम उसे अपना भागीदार बना लोगे तो बहुत लाभ होगा।

अब बताओ कि तुम क्या चाहते हो, तुम्हरा निर्णय क्या है।बैठे रहे हो  मेरे बराबर की कुर्सी पर आज से तुम इस कम्पनी के बराबर के हिस्सेदार हो।

रोहित को विस्वास नही हो रहा था कि यह रहस्समयी आवाज सच भी हो सकती है।

दोस्तों आपको यह कहानी पसंद आई हो तो Please likes, Comments और Share करना न भूले की बात सुनने के लिए प्रेरित कर  सकती हैं दोस्तों यह कहानी बहुत ही रोचक और परेणादायक हैं दोस्तों आत्माए बोलती  हैं अथवा नही यह बात तो बड़े आश्चर्य की है। क्योंकि आज भी जब हम आत्मा की आवाज की बात करते हैं तो हमें विस्वास नही होता की हमारी आत्मा वास्तव मे ही बोल रही हैं।लेकिन जब हम अपने मन के शीशे मे झांक कर देखते हैं तो कुछ कहना चाहती हैं। तो आइए दोस्तों जानते है इस कहानी के बारे मे।

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रोहित क्या तुम सचमुच ही मुझसे प्यार करते हो ?

हाँ……

तो फिर आत्मा की आवाज पर विश्वास करो….

रोहित बेचारा क्या बोल  सकता था उसकी गरीबी ने उसे चितिंत कर रखा था। जब से उसने होश सँभाला था, यही गरीबी देख रहा था। उसने गरीबी और परेशानी के सिवा कुछभी नही देखा था। उसकी पत्नी रीता बड़ी ही सुंदर और बुद्विमान थी हर मामले में वह उसकी पूरी- पूरी सहायता करती थी। ईश्वर की कृपा से उसके यहाँ एक बेटे ने भी जन्म लिया।

जबतक वे दोनों पति- पत्नी रहते थे। तब तक उन्हें कभी भी अपनी गरीबी का अहसास नही हुआ था। परंतु जैसे ही  रीता एक बच्चे की माँ बनी तो उन्हें दिन प्रतिदिन अपनी गरीबी का अहसास होने लगा था। बच्चे के पालन पोषण के लिये माँ- बाप अपना सब कुछ दाव पर लगा देने को तैयार हो जाते हैं। यही हाल इन माता-पिता का था। जो बच्चो के स्वास्थ्य के लिये अधिक चितिंत रहते थे। करते भी क्या? उनसे बस मे ही क्या था?

बच्चे का स्वस्थ्य बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण था उसकी शारीरिक कमजोरी।

और इस कमजोरी का कारण था। उनकी गरीबी

बस यही गरीबी उनके बच्चो के स्वास्थ्य की शत्रु बन गई थी। वह दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी। एक दिन पत्नी ने बच्चे को रोते पड़पते बिखलते देख कर कहा।

रोहित, हम कब तक गरीबी की इस भट्ठी में जलते रहेगें। कब तक हमारा बच्चा भूख के मारे तड़पता रहेगा।

आखिर कब तक…….

रोहित बेचारा अपनी हालत को अच्छी तरह जानता था।उसे पता था इतनी कम आमदनी में उनके घर का गुजाराहोना बड़ा कठिन ही है। ऊपर से बच्चे का बोझ ……….. रीता एक माँ थी,बच्चे की हालत देख उसका दिल भी डूबने लगा था।दुःख के मारे उसकी आँखों से आंसू निकलने लगे। वह बहुत प्रयत्न करता रहा कि किसी तरह से बीबी के सामने उसकी यह कमजोरी न आये। मगर गम जब हद से बढ़ जाता है तो उसे कौन रोक सकता हैं।

रोहित , तुम रो रहे हो ?

हां, रीता……..

लेकिन क्यों ?

अपनी गरीबी के हाथों मै इतना मजबूर हो गया हूँ कि दिमाग भी काम नही कर पा रहा कि अब करू भी तो क्या करूँ कोई भी तो सहायता करने वाला नजर नही आ रहा आखिर इस थोड़े से वेतन मे हम करें भी तो क्या ?

कुछ तो सोचना होगा, अपने लिये न सही तो अपने बच्चो के लिये ही कुछ करना ही होगा……करना ही होगा……

भले ही मुझे नोकरी ढूढ़ने के लिये शहर से बाहर ही क्यों न जाना पड़े।

नही रोहित, तुम बाहर नही जाओगे। मै इस बच्चे के साथ कहाँ भटकती फिरूंगी। देखो न यह हम दोनों के साथ घुला मिला है। कैसे रहेगा यह आपके बिना नही…..नही…..रोहित ऐसा नही होगा।

तो फिर क्या होगा ?

क्या होगा ? यह कहते हुए वह कुछ सोच में पड़ गयी जैसे कुछ याद कर रही हो।

रोहित

हां……

आज मेरा मन कह रहा है की तुम्हे कोई बहुत अच्छी नोकरी मिलने वाली है।

मुझे और अच्छी नोकरी। नही …..नही……यह सभव हो सकता है। अपना भाग्य इतना तेज कहा। छोड़ो इन बातों को यह सब तो लंबे  समय से हो रहा है।हर रोज हम यही आशा लेकर सोते हैं। और यही विचार बना कर मै घर से निकलता हूँ।

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क्या तुम भी आत्मा की आवाज पर विस्वास करती हो ?

करती तो नही मगर आज तुम्हरे आंसू देख कर मेरा मन पिघल गया। मेरी आत्मा तड़प उठी। मैने अभी- अभी हाथ जोड़ कर अपने ईश्वर से पार्थना की…..

हे ईश्वर यदि हमारे मन साफ हैं, हमने आज तक किसी का बुरा नही किया तो फिर हमारे साथ ही क्यों अन्याय कर रहे हो। क्यों हम पर अत्याचार कर रहे हो ?

सारी दुनिया खुशियां मनाती हैं तो हम आँसू बहाते है। ऐसा क्यों हैं ईश्वर यह अन्याय हमारे साथ ही क्यों हो रहा हैं।

हम पर दया करो प्रभु। हम पर यदि दया नही करते तो इस मासूम बच्चे पर तो दया करो जो दूध रोटी के लिए रो रहा है।

पत्थर मत बनो ईश्वर, पत्थर मत बनो।

तो फिर क्या हुआ ? रोहित ने आश्चर्य भरे स्वरों में आपनी पत्नी से पूछा…..

उसी समय मेरी आत्मा से यहआवाज आयी

देवी हमने तुम्हरी फरियाद सुन ली है। अब रोहित को अपने एक निकटतम दोस्त के पास भेज दो बस तुम्हरी सारी  परेशानियां दूर हो जाएंगी।

रोहित ने अपनी पत्नी के मुख से सब बातें सुनी तो उसे विस्वास तो नही हो रहा था कि ऐसी देवी शक्ति सच हो सकती है। मगर फिर भी दिल को मजबूत करके अपने एक पुराने दोस्त के पास गया जो इसी शहर में कारोबार करता था। वैसे भी उसने अपने बहुत कम दोस्त बना रखे थे। मगर इन सबमें से अच्छा मुकेश को मानता था। क्योंकि वह बहुत अमीर हो गया था, इसलिए वह उससे बहुत कम मिलता था। मगर आज अपनी पत्नी की आत्मा की आवाज वाली की वह परीक्षा करना चाहता था।

जिस समय रोहित मुकेश के दफ्तर में प्रवेश कर रहा था तो मुकेश ने उसे देखते ही चिल्लाना शुरू कर दिया था।

अरे तू कहाँ मर गया था। मैं तो कई दिन से तुम्हे याद कर करके पागल हो रहा हूँ।हमारे घर पर भी  चार बार आदमी गया तो अंत मे पता  चला की तुम उसे छोड़ कर कहि और चले गए हो

हां, उस मकान का किराया मेरी आमदनी से अधिक था, इसलिए छोड़ना पड़ा।

बस इतनी सी बात ……

मुकेश, तुम्हरे लिये जो बात बहुत छोटी है।वहीमेरे लिये बहुत बड़ी हो सकती है। इसका कारण है मेरी गरीबी और तेरी अमीरी।

बकवास बंद कर साले, इस दोस्ती में अमीरी- गरीबी कहा से आ गई। चल चुपचाप बैठ जा इस दफ्तर में, आज से तुम इस कम्पनी में बराबर के भागीदार होंगे।ण है मेरी गरीबी और तेरी अमीरी।

यह तुम…..रोहित की आवाज गले में ही अटक कर रह गई जैसे अपने कानों पर विस्वास न आ रहा हो।

मै जो कुछ कह रहा हूँ, वह सत्य है, मेरे दोस्त न तो यह कोई सपना है न किसी का आदेश, बस कल रात मैने अपनी आत्मा से उठने वाली यह आवाज सुनी थी।

रोहित तुम्हरा सब से प्यारा दोस्त लोगों के पास नोकरी कर रहा है। वह कितना चितिंत है।यह तुम नही जानते मगर यदि तुम उसे अपना भागीदार बना लोगे तो बहुत लाभ होगा।

अब बताओ कि तुम क्या चाहते हो, तुम्हरा निर्णय क्या है।बैठे रहे हो  मेरे बराबर की कुर्सी पर आज से तुम इस कम्पनी के बराबर के हिस्सेदार हो।

रोहित को विस्वास नही हो रहा था कि यह रहस्समयी आवाज सच भी हो सकती है।

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