चमकीला प्रेत: जिसकी वजह से बदल गयी ज़िन्दगी

​दोस्तों आज मै आपके लिये जो कहानी ले के आई हूँ वो है चमकीले प्रेत की। इसमें मुख्य पात्र रॉबिन है। तो आइये दोस्तों जानते है इस कहानी के बारे मे।

यह कहानी 17 अक्टूबर 1963 की रात 10 बजे का समय।

अमरीका का दक्षिण – पूर्वी राज्य अलबामा ।

राज्य का सबसे अल्पायु मे पुलिस अफसर का रुतबा पाने वाला ब्रेडन। उम्र अभी उसकी मुशिकल से पच्चीस वर्ष थी। लेकिन अलबामा का स्टेशन अफसर बन गया था वह। मातहतों को जरुरी आदेश निर्देश देने के बाद वह घर जाने को निकल ही रहा था।

उसी समय उसका फ़ोन बज उठा। कुछ सोच मे पड़ गया। क्योंकि अब वह घर ही जा रहा था और फ़ोन वही से उसकी नौकरानी का था। वह बोल रही थी- सर ! फ्लेट के पास वाले खेतो में जाने क्या हो रहा है……। वहाँ कुछ अजीब सा उजाला हो रहा है और बहुत डरावनी आवाजे आ रही है। आस- पास रहने वाले सब आदमी बड़े डरे हुए है और एक साथ एकत्र हो रहा हो है। खेत में आज शायद भूतो की पार्टी चल रही है। जल्दी आइए….।

“व्हाट स्टुपिड! मै अभी फ़ौरन आ रहा हूं।अपनी मेमसाहब को भी समझा देना। भूत-प्रेत बेकार की बकवास है ऐसा।” नोकरानी को डाँटते हुए उसने कहा।

फ़ोन काटकर वह कैमरा उठाये थाने से निकल गया।

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ब्रेडन स्टाफ कार को ही लेकर फकविले स्थित अपने फ्लैट पर जाने के लिए रवाना हो गया।

अपनी कालोनी में वह प्रवेश भी नही कर पाया था कि उसकी कार इंजन झटके के ठप्प हो गया।

इस प्रकार इंजन ठप्प होने से कार बीच रास्ते में खड़ी होने से परेशान ब्रेडन ने कार को फिर चालू करना चाहा।

लेकिन वह हैरान हो उठा।

क्योंकि अचानक चारो तरफ से उसे हा-हा -हू-हू जैसी विचित्र और डरावनी आवाजे सुनायी देने लगी। जैसे- सेकड़ो प्रेत एक साथ चिल्ला उठे हों।

आस-पास नज़र घुमाने पर उसे कुछ भी नही दिखा

उसी समय तेज अंधड़ भी शुरू हो गया।

तभी ब्रेडन को रास्ते के एकदम बीच में खड़ी विचित्र सी इंसानी आकृति दिखाई पड़ी। जिसके सिर पर छोटे-छोटे दो सींग भी थे। इस विचित्र मानव के सिर से पैर तक चांदी जैसी रंगत चमचमा रही थी। जैसे उसके सारे शरीर पर बल्ब जला दिये गये हो अथवा कोई चकदार धातु या पन्नी मढ़ दो गयी हो। लंबाई भी उसकी सात फ़ीट से ज्यादा ही दिखाती थी।

यह कैसा विचित्र प्राणी है? लगता तो इंसान जैसा ही है…..। किसी दूसरे ग्रह से भटक कर नही आ गया। धरती का तो नही लगता । किन्तु उड़नतश्तरी या ऐसा कोई विमान तो नही दिख रहा है आस-पास …..। आश्चयर्चकित ब्रेडन मन ही मन सोचने लगा।

अचानक ब्रेडन ने अपना कैमरा निकाल कर सीधा किया और उसके दनादन कई फोटो खींच डालें।

ब्रेडन के फोटो खीचना शायद उस आकृति को पसंद नही आया और वह कार की तरफ ऐसे लपकी जैसे रास्ते पर पारा फिसल रहा हो। उस विचित्र मानव कोअपनी तरफ आता देख घबराये ब्रेडन ने कार की ऊपर वाली बत्ती आन कर दी तथा पुलिस अभियानों में काम आने वाला सायरन भी बजा दिया।

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बत्ती चालू होने व सायरन बज उठने के साथ ही वह मानव कुछ फिसलता हुआ सा वापस भागता दिखाई दिया तथा कुछ ही देर में वह सड़क पर से औझल हो चुका था।

सुबह हुई।

थाने में आकर ब्रेडन ने रात के हादसे की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की तथा विभागीय अधिकारियो को सूचित करने के साथ ही यह खबर फोटो सहित एक अखबार को सौप दी। जिसने इसे बड़े चटपटे ढंग से प्रथमिकता के साथ प्रकाशित किया।

लेकिन उसी दिन ब्रेडन पर दुर्भाग्य की छाया पड़ गयी।

अकारण ही घर में लड़ाई  करके ब्रेडन की पत्नी उसे छोड़ गयी। एक सप्ताह होते-होते बहुत अजीब ढंग से उसकी कार में आग लग गयी। उसके पास अपनी एक बड़ी कार भी थी, जिसमे बेडरूम आदि की सुविधा भी थी। जाने किस प्रकार वह भी आग से स्वाहा हो गयी।

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इस वारदात के कोई आज माह बाद उच्च अधिकारियो ने उसे एक गैर ज़िमेदार पुलिस अधिकारी बताते हुए बर्खास्त कर दिया। उसे दिये आरोप -पत्र में कहा गया था – भूत-प्रेत जैसी बकवास पर आपने बिना पक्के प्रमाणों के यकीन किया तथा जनता में भय प्रसारण का साधन बने। बिभाग को आप जैसे गैरज़िमेदार स्टेशन अफसर की जरूरत नही है। इसलिए आपकी सेवाए समाप्त की जाती है।

चमकीले प्रेत के ब्रेडन द्बारा खिंचे गये फोटो भी उसके सच्चा होने का प्रणाम न बन सके
। यह कहा गया यह मनगढ़त ड्रामा बनता है।

जन विश्वास है कि उस प्रेत के चित्र ब्रेडन ने समाचार पत्र को दे दिये थे। जिस से क्रोधित होकर प्रेत ने उससे बदला लिया है।

इसके बाद चमकीले प्रेत को कभी किसी ने देखा। लेकिन आम लोग इस सच्चाई को स्वीकारते है कि उस दिन वास्तव में वह प्रेत था और इलाके में भयानक व रहस्य आवाजो भी गूँजी थी।

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