साँप जैसे टिलो का रहस्य

​दोस्तों आज मै आपके लिये जो कहानी ले के आई हूँ जिसका शीर्षक हैं  “अमरीका में पाए जाने वाले साँप जैसे टीलो का रहस्य” दोस्तों क्या आप इस बात पर विशवास करेगे कि मध्य अमेरिका की प्रायः सारी पुरातन सभ्यताओं में साँप को पृथ्वी की आत्मा माना गया हैं।

साँप की विशेषता केवल भारत में ही नही बल्कि अमेरिका के लोग भी इसे देवता ही समझते हैं। यही कारण है कि अमेरिका में कुछ टीले ऐसे भी है जिन्हें सांपो से सज्ञा दी गई है। तो आइये दोस्तों जानते है उन टीलो के रहस्य के बारे में।

प्रकृति के हर दृश्य में आपको कोई न कोई रहस्य तो जरूर नजर आएगा। प्रकृति की कोख में क्या कुछ छिपा हुआ है। यह जानना तो हर इंसान के वश की बात नही है। मगर इस संसार में कुछ ऐसे भी लोग जन्म लेते है जो हर रहस्य के बारे में जान लेना चाहते हैं। भले ही इन कामो में उनकी जान चली जाए मगर वे अपने काम को पूरा किए बिना नही रह सकते, ऐसे लोग मत्यु से नही डरते, न ही इन्हें धन का लोभ पथभृष्ट कर सकता है।

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ऐसे ही लोगो में से एक थे पिडजिर्यंन, इनकी ही मेहनत का यह फल है कि उत्तरी अमेरिका में पाये जाने वाले साँप के आकार वाले मिट्टी के टीलो को सब से अधिक प्रसिद्ध मिली। इनमे से काऊंटी का टीला सबसे लम्बा हैं। लगभग 38 फुट के करीब है। स्कुडर डेविस जैसे प्रसिद्ध विद्वानों ने इन टीलो को पास से जाकर देखा है।

असल बात तो यह है कि यह टीले दूर से दिखने में एक प्रकार से साँप जैसे ही नज़र आते है। कुछ लोग तो इन्हें साँप कर ही डर जाते है।

वहाँ के निवासियों का कहना है कि जब भी कभी कोई परदेसी पर्यटक इस क्ष्रेत्र में आते है तो उनमें से कुछ एक तो ऐसे होते है जो साँप और भूत के नाम से खूब डरते है। बस ऐसे लोग जब कभी इस टीले को देखते है तो उन्हें मुँह से एक चीख सी निकलती सुनाई देती है।

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साँप…साँप….

साँप…साँप….

इस प्रकार की घटनाएँ जब निरन्तर होने लगी तो  प्रसिद्ध विद्वान विलियम पिडजिर्यन ने इस टीले के रहस्य को जानने का प्रयास किया। उस महान बिद्वान ने अपनी जान की परवाह किए बिना ही इस क्षेत्र की और बढ़ना शुरू किया।

यह सुना और वीरान पहाड़ी आदिवासी क्षेत्र।

दूर दूर तक किसी आदमी की आवाज नही सुनाई दे रही थी। केवल सायं…. सायं की आवाजें सुनाई दे रही थी। जिन्हें सुनकर ऐसा प्रतीत होता था कि विचित्र जीव बोल रहा थी। पिडजिर्यंन जैसे सनकी लोग इन छोटी-मोटी चीज़ों की परवाह कहां करते है। डर कभी भी उनके रास्ते का रोड़ा नही बनता। वह बढ़ता गया…..अपनी मंजिल की ओर… चिता से बहुत दूर, उसका एकमात्र लक्षय था इन साँप के टीलो के रहस्य को जानना।

बढ़ते-बढ़ते वह जब पहले टीले पर पंहुचा तो काफी थक चूका था। साँप जैसे आकार वाले टीले के उगे ऊँचे- ऊंचे वृक्षों की छाया और साथ में ठंडी के झोंके का आंनद लेते हुए उसने ऊपर आकाश की ओर देखते हुए कहा – हे संसार के स्वामी , तुम्हारे ये कैसे-कैसे रंग है। इस धरती पर तो तुम्हरा हर खेल निराला हैं। हर चीज़ विचित्र है। रहस्यमय इस सृष्टि के स्वरूप को यदि गहराई से देखा जाए तो……

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इंसान को मजबूर होकर यह कहना ही पड़ेगा।

हे प्रभु,तुम महान हो

तुम्हरी लीला तीनों लोकों से न्यारी है।

तुम महाशक्तिशाली हो।

यही कारण है कि लोग कुछ भी बन जाए, वे तुम्हरे आगे सिर झुकाने पर मजबूर हो जाएंगे।

दोस्तों यह कहानी अभी ख़त्म नही हुई है इसका अगला भाग जल्द आपके सामने ले के आउंगी ।

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