A True Story of Legendary Personality – सुल्ताना डाकू

सुल्ताना डाकू : ​दोस्तो वैसे तो आपने डाकुओं और लुटेरों की कहानियां टीवी या फिल्मों मे बहुत सी देखी होगी पर आज मे आपके लिए ऐसी कहानी लाई हूं। जो की सत्य घटना पर आधारित हैं  जिसके पात्र का नाम सुल्तान है। तो आइए जानते है सुल्तान डाकू के बारे मे। 
दोस्तों यह सुल्ताना की नजीबुद्दौला के किले से पहचान की एक सत्य कहानी है। खूंखार, दबंग और अपराधी प्रवृत्ति के लिए बदनाम हुई भातु नामक एक दलित जाति है  जिसमे सुधार लाने के नाम पर तत्कालीन अंग्रेजी प्रशासन ने इस पत्थरगढ़ के किले को भातुओं के सुधार गृह के रूप में इस्तेमाल किया था। दोस्तों उस समय स्वतंत्रता आंदोलन देश में जोरों पर चल रहा था और सशस्त्र क्रांति में विश्वास करने वाले स्वतंत्रता के आंदोलनकारियों को भातु जाति के, नवयुवकों का बड़ा सहयोग मिल रहा था। और भातु जाति के लोगो ने अंग्रेजी साम्राज्य की नाक मे दम कर रखा था।

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फिर अंग्रेजी प्रशासन ने भातुओं पर नजर रखने इनको इस पत्थरगढ़ के किले में निरुद्ध कर दिया। इन में से सुल्तान नामक एक युवक कुछ युवाओं के एक गुट के साथ विद्रोह करके अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र जंग में कूद पड़ा। जिससे अंग्रेजी शासक यहाँ से चले जाये। इसने अपना एक संगठन बनाया और कुछ ही दिनों में अंग्रेजी शासक और उनके पिठ्ठू ज़मीदार सुल्ताना के नाम से थर्राने लगे। उसका नाम सभी जगह फेल गया।

अंग्रेजों के चमचे कहे जाने वाले जमींदारों की तो मानों शामत ही आ गई। सभी उस से डरने लगे। उस समय के अंग्रेज पुलिस कमिश्नर मिस्टर यंग थे। उन्होंने  सुल्ताना को पकड़ने के लिए देशभर में जाल बिछाया था। बिजनौर में किलेनुमा थाने भी उसी समय खोले गए थे। परन्तु सुल्ताना इतना चालाक था कि अंग्रेज पुलिस उसे पकड़  नही पाई।

दोस्तों कहाँ जाता है कि किसी संत ने सुल्ताना को बोला था, कि जब वह प्रसन्न होकर किसी बच्चे को गोद में उठायेगा तो उसकी मृत्यु निकट होगी। इसीलिए सुल्ताना ने अपनी शादी भी नहीं की थी

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एक दिन जनपद के मिट्ठीबेरी गांव में सुल्ताना ने एक महिला के नवजात बच्चे को गोद में उठाया, तभी उसे संत की बात याद आयी और उसी समय अंग्रेज पुलिस के घेरे में आकर, अपने करीब 150 साथियों के साथ पकड़ा गया।उसके पश्चात्  सन् 1927 में सुल्ताना को आगरा की सेंट्रल जेल में उसके 15 साथियों के साथ फांसी दे दी गई थी।

दोस्तों अंग्रेज तो उसको डाकू मानते थे, लेकिन कुछ लोगों का यह मत है कि वह डाकू नहीं बल्कि एक क्रांतिकारी था। उसके पकडे़े जाने को लेकर और भी कुछ भ्रांतिया हैं जिनमें एक श्रुति यह भी है कि नजीबाबाद के कुछ जमीदारों पर यकीन करके उनकी मुखबरी पर सुल्ताना पकड़ा गया था। लेकिन अब भी सुल्ताना डाकू के नाम पर रंगमंच पर नाटक भी खेला जाता है, जिसे लोग बड़े चाव से देखते हैं।

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वैसे सुल्ताना के बारे में कहा जाता है कि अंग्रेज़ो से बग़ावत करने के बाद वो उन लोगो को अपना शिकार बनाता था जो अंग्रेज़ो को साथ देते थे और चापलूसी करते थे, जिनमें ज़्यादातर ज़मिंदार आते थे! और लूटा हुआ माल ग़रीबो में बाँट दिया करता था! अंग्रेज़ो से छिपते रहने के बाद इसने नवाब नजीबबूदोला के किले को अपने और अपने साथियों के छिपने का अड्डा बनाया और अंग्रेज़ो को चकमा देता रहा! सालो तक उसके किससे मशहूर रहें हैं!

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