​​एक शापित बस्ती…जहा मौत भी आ जाए तो…….!!!!

​एक शापित बस्ती: दोस्तों आज मे बात करूंगी मुंबई की ऐसे मोहल्ले की जिसका नाम नजरवाडी  है। दोस्तों आपको पता है यहाँ के स्थानीय लोगो ने इस चाल का नाम नजरवाडी चाल क्यों रखा हैं। आइये मै आपको बताती हूँ।

दोस्तों इस चाल के बारे में मुंबई के बहुत कम लोगो को पता है। इस चाल में घटी एक घटना मे आपको बताना चाहती हूं  जिससे इस चाल को शापित माना जा सकता है। दोस्तों शायद आप इस किस्से पर यकीन ना करे लेकिन ये सच्ची घटना है। तथा पात्रो के नाम काल्पनिक रखे गए हैं।

दोस्तों यह बात आज से कुछ साल पहले की है एक दिन की बात है  अनुज नाम का आदमी अपनी गर्भवती पत्नी को अस्पताल ले के जा रहा था और अचानक इस चाल के पास उनकी  गाडी खराब हो गयी। वो सड़क रात को एक दम सुनसान रहती थी और रात को वहा से कोई नहीं गुजरता था। बेचारे अनुज का मोबाइल नेटवर्क भी वहा काम नहीं कर रहा था जिससे वो किसी को मदद के लिए बुला सके।

अनुज कार से बाहर निकला और उस चाल में मदद के लिए गया लेकिन चाल एकदम सुनसान थी। एक भी इन्सान बाहर नहीं था। अनुज एक घर के बाहर दरवाजा खटखटाने लगा और मदद मांगने लगा लेकिन दरवाज़ा नहीं खुला। ऐसा करते उसने चार पांच दरवाजों को खटखटाया लेकिन किसी ने भी दरवाज़ा नहीं खोला। वो अपनी पत्नी की हालत देख कर घबरा रहा था। और गुस्से मे चिल्लाकर बोलने लगा कि ये बस्ती वाले कैसे लोग है किसी की मदद नहीं करते है। तभी वहा एक आदमी ने दरवाज़ा खोला और बोला कि रात होने के बाद यहा कोई किसी की मदद नहीं करता। ये सुनकर अनुज हैरान हो गया। उधर उसकी पत्नी प्रसवपीड़ा से तड़प रही थी।

थोड़ी देर में निराश होकर वहा बाहर चबूतरे पर बैठ गया तभी पहली मंजिल पर एक दरवाज़ा खुला। अनुज बहुत खुश हुआ और दौड़ा दौड़ा उपर उस मंजिल पर गया। वहा एक औरत खडी थी और बोली “बेटा, तुम इतनी रात यहा क्या कर रहे हो।” अनुज ने सारा किस्स्सा बताया तो उस बुढी औरत ने कहा “यहाँ कोई किसी की मदद नहीं करता।” तब बुढी औरत ने अनुज को बताया की वो 30 सालो तक अस्पताल में दाई का काम करती थी और उसकी मदद कर सकती है। और कुसुम को लाने को बोला। अब अनुज कुसुम को लेकर आ गया।

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उसने कुसुम को देखा और कुछ दवाइया लाने को बोला। अनुज भाग कर दवाइया लेने गया लेकिन वहा उस सुनसान इलाके में तो कोई  भी दूकान उसे नहीं मिली। अनुज ने काफी चक्कर काटे और निराश होकर लौट आया। अब वो उस बुढी औरत के कमरे की ओर गया और देखकर भोचका हो गया कि उस कमरे के दरवाजे पर तो ताला लगा हुआ था। वो बहुत घबरा गया था उसने आस पड़ोस से चिल्लाकर उस बुढी औरत के बारे में पूछा तो लोगो ने बताया कि वो तो कई साल पहले मर चुकी है। अब अनुज काफी घबरा गया।

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उसने पत्थर से पटक पटक कर ताला तोड़ दिया और अंदर गया। उस कमरे में देखा तो उसकी पत्नी मर चुकी थी। अनुज चिल्लाकर  बहुत रोने लगा। तभी वो बुढी औरत उसको दिखी और बोलने लगी “कई साल मेरी बेटी को कुछ गुंडे उठाकर ले गये और मोहल्ले के एक इन्सान ने मेरी मदद नहीं की और तड़प तड़प कर मेरी मौत हो गयी तब से यहा कोई किसी की मदद नहीं कर सकता ” अनुज अपनी फूटी किस्मत को लेकर रोता हुआ अपनी पत्नी को लेकर वहा से चला गया।

दोस्तों यह कहानी हमे उस चाल के रहने वाले लोगो ने बताई थी जिसे टीवी सीरियल में दिखाया गया था। अब इस पुरी घटना में कितनी सच्चाई है ये तो नजरवाडी के  लोग ही आप को बता सकते है।

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