Mood Swings – How to Change the Mood

​हेल्लो दोस्तों आज मै बात करूँगी Mood Swings की, यह होता क्या है ? और इससे केसे निजात पा सकते हैं l 

दोस्तों मूड स्विंग्स वैसे तो हर Age ग्रुप मे हो जाता है। दिमाग में अचानक होने वाले बदलावों को मूड स्विंग्स कहते हैं।

दिमाग में बनने वाले केमिकल्स की वजह से मूड स्विंग्स होते हैं। किसी के भी साथ होने वाले मूड स्विंग्स इन्ही केमिकल्स के अंसतुलन के कारण होते हैं।लेकिन 60 प्लस के ऐज group मे यह problem बढ़ जाती है।

इस उम्र मे मूड स्विंग्स होता ही है कभी अधिक खुशी तो कभी डिप्रेशन महसूस होता हैं। दोनों ही एज ग्रुप उत्साहित और डिप्रेशन के शिकार जल्द होते हैं।

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सबसे पहले पेशेंट के व्यावहारिक परिवर्तन को पहचाने जैसे-

अधिक बोलना

ज्यादा हँसना

घूमना

अति उत्साहित होना

दुखी रहना

हर समय विचार करते रहना जैसे कोई सिमटम नजर आ रहे हैं।तो सबसे पहले उनकी काउंसलिंग करे।

महिलाओं मे अक्सर हार्मोन्स डिसबैलेंस की वजह से मूड स्विग की समस्या हो जाती हैं। जिसमे  चिड़चिड़ापन ,गुस्सा इमोशनल होना आदि  होता है।कई बार प्रेग्नेंसी और अन्य कई वजहो  के कारण भी बदलता रहता हैं। लेकिन सीनियर सिटीजन का बिशेष ख्याल रखना चाहिए। ऐसे मे उन्हें स्पोर्ट करे, अपने से दूर महसूस ना करवाये , छोटी- बड़ी  एक्टविटी मे इन्वॉल्व करे। इसके बाद भी व्यवहार में कुछ अलग लग रहा हैं तो  मनोचिकित्सक के पास ले जाए।60 प्लस के लोग खुद को व्यस्त रखे , व्यायाम करे,कभी भी गिव अप ना करे। अपने पसन्द की किताबें पढ़ते- लिखते रहें।पार्क ,घर,और आसपास होने वाली एक्टिविटी मे इन्वॉल्व रहें। संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए । सीजनल  फ्रुट्स और वेजिटेबल का भरपूर प्रयोग करना चाहिए।

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